इंटरनेट क्या है - इंटरनेट के प्रकार?


हैलो एवरीवन होप करता हूँ आप सब बढ़िया होंगे आज हम एक इंटरेस्टिंग टॉपिक पे बात करने वाले हैं आज की पोस्ट आप सब के लिए काफी इंफॉर्मेटिवे होने वाली है तो पोस्ट पर लास्ट तक बने रहिये। आप इंटरनेट का इस्तेमाल करते तो हैं लेकिन क्या आपको पता है internet kya hai (what is internet) या इंटरनेट का क्या उपयोग है और इंटरनेट कहां से आता है इन्ही सब टॉपिक पे विस्तार से बात करेंगे हम तो चलिए अब शुरू करते हैं।

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आज के टाइम में internet हमारी लाइफ का एक इम्पोर्टेन्ट हिस्सा बन चुका है और बने भी क्यू न हम सब इन्टरनेट के ज़रिये कोई भी काम आसानी से कर सकते हैं फिर वो चाहे online shopping, online course, online chatting हो या net banking, office work या कोई सा भी online work हो हम इन्टरनेट से हर काम को बहुत आसानी से कर सकते हैं। इसलिए आजकल लगभग हर कोई इन्टरनेट का इस्तेमाल करता है। बिना इंटरनेट के रह पाना बहुत ही मुश्किल है आप खुद ही इसकी कल्पना कर सकते हैं इन्टरनेट दुनिया का सबसे बड़ा नेटवर्क माना जाता है। इन्टरनेट एक जाल है जो की दुनिया भर में फैला हुआ है इन्टरनेट कंप्यूटर का एक ग्लोबल नेटवर्क है जो हज़ारो लाखो कंप्यूटर्स को आपस में जोड़ने का काम करता है। ये एक wire का बना हुआ जाल है जिसके अंदर से होते हुए सारा डाटा दुनिया भर में घूमते रहता है उस डाटा में कुछ भी शामिल हो सकता है जैसे images, texts, videos, audios etc ये जाल एक तरह से एक रास्ता है या एक मीडियम जहाँ से सारा डाटा गुज़रते हुए निकलता है।


अगर बात करें इंटरनेट कितने प्रकार के होते हैं तो इसको हम इंटरनेट कनेक्शन के प्रकार के तौर पर समझ सकते हैं।


  • Dial up connection

  • DSL (Digital Subscriber Line)

  • Leased line

  • Broadband connection

  • Satellite internet connection

  • Mobile internet connection

  • Wi-Fi broadband

  • Fibre optic broadband

  • VSAT (Very Small Aperture Terminal)

  • ISDN (Integrated Subscribe Digital Network)



what is dial up connection in hindi | dial up connection kya hai


Dial up connection को इंटरनेट प्रोवाइड करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो की public switched telephone network (PSTN) के इस्तेमाल से इन्टरनेट प्रोवाइड करता है dial up में analog modem और standard phone lines की हेल्प से इंटरनेट डाटा को send और recieve किया जाता है। dial up से इंटरनेट एक्सेस करने के लिए काम खर्च आता है लेकिन इसकी स्पीड भी काफी कम होती है जो की लगभग 56 kbps की स्पीड होती है। इसीलिए दिन पर दिन डायल अप के यूजर भी काफी कम होते जा रहे हैं। क्यू की आज कल हर किसी को फ़ास्ट स्पीड वाला इन्टरनेट चलाना पसंद है उसके लिए भले ही थोड़ा ज़्यादा पैसे क्यू न देना पद जाए। डायल अप इन्टरनेट सेवा पाने के लिए यूजर के पास एक कंप्यूटर और एक modem का होना बहुत ज़रूरी होता है।



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dial up connection ka itihas | history of dial up connection in hindi


Dial up का आविष्कार सन् 1979 में Tom trustcott और Steve bellovin ने इसका पहला निर्माण किया था एक telephone और एक modem के ज़रिये इन्टरनेट से जुड़ने के तरीके के रूप में किया गया था modem एक इन्टरनेट प्रोवाइडर ISP का नंबर डायल करने के लिए फ़ोन लाइन का इस्तेमाल करता है और इंटरनेट कनेक्शन से जुड़ जाता है।





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dsl kya hai in hindi | what is dsl in hindi


DSL full form (Digital Subscriber Line) dsl डायल अप की तुलना में काफी तेज़ होता है dsl भी डायल अप की तरह डाटा सेंड और रिसीव करने के लिए फ़ोन लाइन का इस्तेमाल करता है बात करें स्पीड की तो इसकी स्पीड 128 kbps से स्टार्ट होती है जो की डायल अप से दो गुना ज़्यादा है तो आप खुद समझ सकते है दोनों की स्पीड में कितना फ़र्क़ होता है। dsl की स्पीड 8 mbps से भी ज़्यादा है जो की डायल अप से 1100 गुना ज़्यादा है। dsl टेलीफोन तारो का इस्तेमाल करता है। यह घरों या बिज़नेस के कार्यो में internet connection लाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली तकनीकों में से एक है।




dsl ka itihas in hindi | history of dsl in hindi


सन् 1980 के दशक में Joseph Lechleider ने  एक हार्ड प्रॉब्लम का एक परफेक्ट solution लेकर आए जिससे लाखों घरों में हाई-स्पीड इंटरनेट का आनंद ले पाना पॉसिबल हो गया। उनके इस आईडिया ने उन्हें राष्ट्रीय आविष्कारक हॉल ऑफ फ़ेम में एक स्थान दिया जिसे इंटरनेट सेवा के पिता के रूप में जाना जाता है जिसे dsl कहा जाता है। Joseph Lechleider जिनकी 18 april को फिलाडेल्फिया में 82 साल की उम्र में उनके घर पर death हो गई बेल टेलीफोन कंपनियों की अनुसंधान लैब बेलकोर में एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे। उस वक़्त फोन कंपनियां नार्मल तांबे के तार से घरों में हाई स्पीड पर सिग्नल भेजने का एक तरीका निकालना चाहती थी मुख्य रूप से केबल टेलीविजन कंपनियों के साथ इंटरैक्टिव वीडियो सेवाओं की पेशकश करने के लिए। तांबे के तार की सीमाओं को दूर करने के लिए डिजिटल तकनीक को लागू करना सबसे अच्छा तरीका था, लेकिन अभी भी एक बाधा थी। जब दोनों दिशाओं में डेटा की गति - डाउनलोडिंग और अपलोडिंग - समान थी, तो बहुत अधिक विद्युत हस्तक्षेप था जो डेटा ट्रैफ़िक को क्रॉल में धीमा कर देता था।




 Leased line connection in Hindi | what is leased line in hindi | leased line kya hai


Leased line का इस्तेमाल कई चीजों के लिए किया जा सकता है, जिसमें दो कार्यालयों को एक साथ जोड़ना, एक कार्यालय को पहले से मौजूद कॉर्पोरेट WAN से जोड़ना, आपके कार्यालय से आपके दूरसंचार प्रदाता को फोन कॉल करना और डेटा केंद्रों को एक साथ जोड़ना शामिल हो सकता है। इस्तेमाल किए जाने वाले प्रोटोकॉल और जिन इस्तेमालो  के लिए leased line लगाई जाती है, वे widely हो सकते हैं। leased line एक fixed bandwidth internet और high speed data या voice line होती है, जो दो लोकेशन को एक साथ जोड़ने का काम करती है। leased line कनेक्शन लेने पर customer को सर्विस प्रोवाइडर को हर महीने या साल का किराया देना होता है। और बात करे इसके किराये की तो बाकी इन्टरनेट सर्विसेस से इसका चार्ज काफी ज़्यादा होता है क्यू की इसकी स्पीड बहुत ज़्यादा होती है, कस्टमर अपने मुताबिक स्पीड को रेंट पर buy कर सकता है।




leased line ka itihas | history of leased line in hindi


सन् 1970 के दशक में बेल बैकबोन नेटवर्क के एनालॉग से डिजिटल सर्किट में रूपांतरण के साथ leased line सेवाएं या निजी लाइन सेवाएं डिजिटल हो गईं, इसने एटी एंड टी को डेटाफोन डिजिटल सर्विसेज बाद में डिजिटल डेटा सेवाओं को फिर से ब्रान्डेड की पेशकश करने की इजाज़त दी जिसने ISDN और TIBM के सिस्टम नेटवर्क आर्किटेक्चर 1974 में बनाया गया या DEC के डीईसीNET 1975 में बनाया गया जिसके माध्यम से mainframe कंप्यूटर को टर्मिनलों और दूरस्थ साइटों से जोड़ने के लिए लीज लाइनों का उपयोग किया गया था। सन् 1980 के दशक में digital सेवाओं के विस्तार के साथ customer को फ्रेम रिले या एटीएम नेटवर्क से जोड़ने के लिए लीज्ड लाइनों का उपयोग किया गया था। one.544 Mbit/s से T3 सर्किट तक की ज़्यादातर संचरण speed के साथ मूल T1 option से access data दरों में बढ़ोतरी हुई है। सन् 1990 के दशक में internet की प्रगति के साथ customer को ISP present point से जोड़ने के लिए लीज्ड लाइनों का भी इस्तेमाल किया गया था जबकी अगले दशक में MPLS एकीकृत के साथ उपरोक्त सेवाओं फ्रेम रिले, एटीएम, व्यवसायों के लिए इंटरनेट का अभिसरण देखा गया था। 21वीं सदी की शुरुआत में इंटरनेट बूम और लंबी दूरी के ऑप्टिकल नेटवर्क या मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क में बढ़ी हुई पेशकश के साथ एक्सेस डेटा दरें भी नाटकीय रूप से 10Gbit / s तक की गति में विकसित हुई।




satellite connection kya hai in hindi | सैटेलाइट internet क्या है | what is satellite internet in hindi


सरल भाषा में सैटेलाइट इंटरनेट का मतलब ISP अंतरिक्ष उपग्रह में data signal send करता है जिसकी हेल्प से हमारा internet चलता है इसके लिए आपके घर या किसी दूसरे रिसेप्टर में एक डिश लगाई जाती है जिससे यह Internet को Bounce करता है आपको पता ही है cable की हेल्प के साथ इंटरनेट provide किया जाता है। लेकिन Satellite Internet में केबल की ज़रूरत नहीं होती है, ऐसी स्थिति में, आप हमेशा ऑनलाइन रहने के लिए सैटेलाइट इंटरनेट पर trust कर सकते हैं।




satellite internet connection ka itihas | history of satellite internet connection in hindi


Internet web satellite link का इस्तेमाल सन् 1970 के दशक से किया जा रहा है, इंटरनेट के शुरुआती दौर में एक नोड को दूसरे नोड से जोड़ने के लिए satellite link का इस्तेमाल किया जाता था। इसे पॉइंट-टू-पॉइंट कनेक्शन कहा जाता था। कई संचार तकनीकों और नेटवर्क टोपोलॉजी को विकसित और तैनात किया गया है। network टोपोलॉजी के नज़रिये से network के types को संक्षेप में present किया जाता है।





mobile internet connection kya hai | what is mobile internet connection in hindi


इस type के connection का इस्तेमाल ज्यादातर मोबाइल में किया जाता है। mobile internet connection में internet service provider कंपनियों के ज़रिये अलग-अलग प्रकार के plan दिए जाते हैं। यूजर इन प्लान को अपने इस्तेमाल या ज़रूरत अनुसार खरीदते हैं। भारत में ऐसी बहुत से ISP कंपनियाँ है जो mobile internet connection provide करती हैं जैसे जियो, एयरटेल, आईडिया, वोडाफोन आदि।




internet ka itihas | history of internet in hindi


सबसे पहले internet की starting अमेरिकी सेना के ज़रिये पेंटागन अमेरिका के department ऑफ़ defence में की गई थी। सन् 1969 में ARPANet मतलब (Advance Research project Agency) नाम का Networking Project launch किया गया था।जिसका इस्तेमाल युद्द के वक़्त बिना किसी कठिनाईयो के private information भेजने और संचार व्यवस्था को सेफ रखने के लिए किया गया था। कुछ समय बाद इससे मिलने वाले फायदों को देख शोधकर्ता, वैज्ञानिक, मिलिट्री के लोग और कॉन्ट्रेक्टर्स इसका इस्तेमाल करने लगे।इसके बाद धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता बढ़ती चली गई। और आज इस नेटवर्क ने पूरी दुनिया में अपनी जगह बना ली है।




broadband kya hai in hindi | what is broadband connection in hindi


ब्रॉडबैंड फाइबर ऑप्टिक्स, वायरलेस, केबल, डीएसएल और सैटेलाइट स्ट्रीमिंग एचडी वीडियो, गेमिंग और बड़ी फाइलों को डाउनलोड करने सहित कई प्रकार की तकनीकों के माध्यम से हाई स्पीड इंटरनेट एक्सेस provide करता है जो सबसे अधिक बैंडविड्थ को खा जाता है। स्ट्रीमिंग संगीत, सर्फिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी दूसरी सभी गतिविधियों के लिए 25 एमबीपीएस से ऊपर कुछ भी काफी होना चाहिए। जो लोग इन्टरनेट पर रात दिन काम करते हैं उन्हें ज़्यादा इन्टरनेट की ज़रूरत पड़ती है या उन्हें फ़ास्ट इन्टरनेट की ज़रूरत हो तो ऐसे लोगो के लिए ब्रॉडबैंड कनेक्शन बहुत हेल्पफुल साबित होता है, Broadband connection का इस्तेमाल करने के लिए ऑप्टिकल फाइबर, कोऑक्सीअल केबल,ट्विस्टेड पेयर  का इस्तेमाल किया जाता है। और ये तकनीक डायल अप कनेक्शन से कई गुना ज़्यादा स्पीड देती है जो यूज़र्स को काफी पसन्द आती है। इसका इस्तेमाल ज़्यादातर घरों में या ऑफिसो में किया जाता है।




broadband connection ka itihas | history of broadband connection in hindi


ब्रॉडबैंड ने 2000 के दशक की शुरुआत में डायल-अप को बदलना शुरू कर दिया था, 2007 तक सभी इंटरनेट users  में से आधे के पास ब्रॉडबैंड कनेक्शन था। ब्रॉडबैंड ADSL कनेक्शन का उपयोग करके तेज गति से डेटा की उच्च मात्रा को स्थानांतरित करने की अनुमति देता है। . ब्रॉडबैंड डायल-अप से भी अलग है क्योंकि यह हमेशा इंटरनेट से जुड़ा रहता है, और काम करने के लिए इसे 'स्विच ऑन' करने की आवश्यकता नहीं होती है। ब्रॉडबैंड ने सन् 2000 के दशक की शुरुआत में एक लाइन में signal को टेलीफोन और इंटरनेट के बाटनें की अनुमति देकर इंटरनेट में नई जान फूंक दी, जिसका मतलब है कि यूज़र्स ऑनलाइन हो सकते हैं और एक ही टाइम में फोन कॉल कर सकते हैं। इससे तेज़ कनेक्शन भी हुए, जिससे इंटरनेट ब्राउज़ करना और फ़ाइलें डाउनलोड करना बहुत  आसान हो गया। ब्रॉडबैंड नेटवर्क के आगमन का मतलब था कि लोग फ़ाइलें, गाने, टीवी शो और फिल्में ज़्यादा रफ़्तार से डाउनलोड करने में सक्षम थे। इसने ऑनलाइन मीडिया में एक पूरी नई दुनिया खोल दी: पिछली 56kbps कनेक्शन की स्पीड पर YouTube जैसी साइटें चला पाना लगभग पॉसिबल नहीं थीं। ज़्यादातर नई तकनीकों की तरह, ब्रॉडबैंड पहली बार लॉन्च होने पर बेहद महंगा था, इसलिए starting में इसका उपयोग काफी कम था। अब लगभग हर कोई ब्रॉडबैंड के किसी न किसी रूप का इस्तेमाल करता है, चाहे वह अपनी फोन लाइनों या दूसरे कनेक्शन प्रकारों के माध्यम से हो। ब्रॉडबैंड के लॉन्च के बाद से, हमने नई ब्रॉडबैंड तकनीक का उदय देखा है, जैसे 4 जी मोबाइल ब्रॉडबैंड, जो उपयोगकर्ताओं को कहीं भी ऑनलाइन प्राप्त करने की परमिशन देता है, और केबल (फाइबर-ऑप्टिक) ब्रॉडबैंड, जिसने यूके में कनेक्शन की स्पीड को बढ़ा दिया है। अधिकतम 300 एमबीपीएस। अब डायल-अप कनेक्शन के दिन लंबे चले गए हैं, जैसा कि वह समय था जब ब्रॉडबैंड बाजार में दो या तीन बड़े खिलाड़ियों का दबदबा था। आजकल, यूके ब्रॉडबैंड क्षेत्र एक खरीदार का बाजार है जिसमें से चुनने के लिए बहुत सारे शानदार ऑफ़र हैं।



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wifi kya hota hai | what is wifi connection in hindi


वाई-फाई एक wireless router से पास के डिवाइस पर send किया जाने जाने वाला radio signal है, जो signal उस data में translate करता है जिसे आप देख सकते हैं और इस्तेमाल कर सकते हैं। device एक रेडियो सिग्नल को वापस router तक पहुँचाता है, जो तार या केबल के ज़रिये इंटरनेट से जुड़ता है। वाईफाई network सिर्फ़ एक इंटरनेट connection है जिसे wirelessराउटर के ज़रिये घर या बिज़नेस में कई उपकरणों के साथ साझा किया जाता है। router सीधे आपके इंटरनेट modem से जुड़ा होता है और आपके सभी wi-fi सक्षम उपकरणों पर इंटरनेट signal प्रसारित करने के लिए एक हब के रूप में कार्य करता है। यह आपको तब तक इंटरनेट से जुड़े रहने की सुविधा देता है जब तक आप अपने नेटवर्क कवरेज क्षेत्र में हों। वाई-फाई आपके वायरलेस राउटर से आपके television, smartphone, tablet और जैसे वाई-फाई सक्षम उपकरणों पर डेटा संचारित करने के लिए रेडियो तरंगों का उपयोग करता है। संगणक। क्योंकि वे एक दूसरे के साथ एयरवेव्स पर संवाद करते हैं, आपके डिवाइस और व्यक्तिगत जानकारी हैकर्स, साइबर हमलों और अन्य खतरों के प्रति संवेदनशील हो सकते हैं। यह विशेष रूप से तब सच होता है जब आप किसी कॉफ़ी शॉप या हवाई अड्डे जैसी जगहों पर सार्वजनिक वाई-फ़ाई नेटवर्क से कनेक्ट होते हैं। जब possible हो, wireless नेटवर्क से कनेक्ट करना सबसे अच्छा होता है जो पासवर्ड से सुरक्षित या व्यक्तिगत हॉटस्पॉट है।




wifi ka itihas kya hai | history of wifi in hindi


अपनी स्थापना के बाद से, वाईफाई ने हमें घर और सार्वजनिक रूप से जोड़े रखने में एक बड़ी भूमिका निभाई है। हम जहां भी जाते हैं, हम कनेक्टिविटी की एक मानक डिग्री की अपेक्षा करते हैं और हमारे संगठन, हमारे स्वास्थ्य और यहां तक ​​कि हमारी सुरक्षा को बनाए रखने के लिए नियमित रूप से वाईफाई पर भरोसा करते हैं। वाईफाई तकनीक में हालिया प्रगति ने इंटरनेट ऑफ थिंग्स में बहुत बड़ा योगदान दिया है, जिससे हम पहले से कहीं ज्यादा जुड़े हुए हैं। लेकिन हम में से कितने लोग wifi तकनीक के पीछे की पूरी हिस्ट्री जानते हैं? वाईफाई का आविष्कार कब हुआ था? वह कितना सटीक काम करता है? और यह 20 वर्षों में कितनी दूर आ गया है? यहां हमने वाईफाई के इतिहास का पता लगाया है, जहां से यह शुरू हुआ, इसने हमें क्या हासिल करने में मदद की है, और यह हमें किस भविष्य का वादा करता है क्योंकि हम तेजी से परस्पर जुड़े हुए हैं। वाईफाई का आविष्कार किया गया था और पहली बार 1997 में users के लिए जारी किया गया था जब 802.11 नामक एक committee बनाई गई थी।




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fibre broadband kya hai | what is fibre broadband connection in hindi


फाइबर ब्रॉडबैंड एक प्रकार का हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड है। यह फाइबर ऑप्टिक केबल का उपयोग करता है, जो मानक कॉपर केबल की तुलना में डेटा ट्रांसफर करने में बेहतर होते हैं। और डेटा के अनुसार, हम ऑनलाइन गेमिंग और स्ट्रीमिंग मूवी और संगीत की बात कर रहे हैं। मूल रूप से, आप इंटरनेट पर अपनी पसंद की सभी चीजें तेजी से कर सकते हैं। यह अधिक दूरी पर high speed data वितरित करने के लिए फाइबर ऑप्टिक केबल्स के नेटवर्क का उपयोग करता है। डेटा वस्तुतः प्रकाश की गति से केबलों को नीचे गिराता है। इसका मतलब है कि आपको तेज़ डाउनलोड गति और इंटरनेट से अधिक विश्वसनीय कनेक्शन मिलने की अधिक संभावना है।




fibre broadband ka itihas | history of fibre broadband in hindi


1954 में, डच वैज्ञानिक अब्राहम वैन हील और ब्रिटिश वैज्ञानिक हेरोल्ड एच। हॉपकिंस ने अलग-अलग इमेजिंग बंडलों पर पेपर लिखे। हॉपकिंस ने बिना ढके रेशों के बंडलों की इमेजिंग पर रिपोर्ट की, जबकि वैन हील ने क्लैड फाइबर के साधारण बंडलों पर रिपोर्ट की। वैन हील ने एक कम अपवर्तक सूचकांक के पारदर्शी आवरण के साथ एक नंगे फाइबर को कवर किया। इसने फाइबर प्रतिबिंब सतह को बाहरी विरूपण से बचाया और फाइबर के बीच हस्तक्षेप को बहुत कम कर दिया। अब्राहम वैन हील एक अन्य योगदान के लिए भी उल्लेखनीय है। अमेरिकी ऑप्टिकल भौतिक विज्ञानी ब्रायन ओ'ब्रायन के साथ बातचीत से प्रेरित होकर, वैन हील ने फाइबर-ऑप्टिक केबलों पर क्लैडिंग का महत्वपूर्ण नवाचार किया। पहले विकसित किए गए सभी तंतु नंगे थे और उनमें किसी भी प्रकार की क्लैडिंग का अभाव था, जिसमें एक ग्लास-एयर इंटरफेस में कुल आंतरिक प्रतिबिंब होता था। 


अब्राहम वैन हील ने कम अपवर्तनांक के पारदर्शी आवरण के साथ एक नंगे फाइबर या कांच या प्लास्टिक को कवर किया। इसने कुल परावर्तन सतह को संदूषण से बचाया और तंतुओं के बीच क्रॉस टॉक को बहुत कम कर दिया। 1960 तक, ग्लास-क्लैड फाइबर में लगभग 1 डेसिबल (dB) प्रति मीटर का क्षीणन था, जो मेडिकल इमेजिंग के लिए ठीक था, लेकिन संचार के लिए बहुत अधिक था। 1961 में, अमेरिकन ऑप्टिकल के इलियास स्निट्जर ने एक फाइबर का एक सैद्धांतिक विवरण प्रकाशित किया जिसमें एक कोर इतना छोटा था कि यह केवल एक वेवगाइड मोड के साथ प्रकाश ले सकता था। मानव के अंदर देखने वाले चिकित्सा उपकरण के लिए स्निट्जर का प्रस्ताव स्वीकार्य था, लेकिन फाइबर में 1 डीबी प्रति मीटर का हल्का नुकसान हुआ था। संचार उपकरणों को अधिक लंबी दूरी पर संचालित करने की आवश्यकता होती है और प्रति किलोमीटर 10 या 20 डीबी से अधिक के हल्के नुकसान की आवश्यकता नहीं होती है।


1964 तक, लंबी दूरी के संचार उपकरणों के लिए डॉ। चार्ल्स के। काओ द्वारा एक महत्वपूर्ण और सैद्धांतिक विनिर्देश की पहचान की गई थी, प्रति किलोमीटर मानक 10 या 20 डीबी प्रकाश हानि। डॉ. काओ ने प्रकाश के नुकसान को कम करने में मदद करने के लिए कांच के शुद्ध रूप की आवश्यकता को भी स्पष्ट किया। 1970 की गर्मियों में, शोधकर्ताओं की एक टीम ने फ़्यूज्ड सिलिका के साथ प्रयोग करना शुरू किया, जो एक उच्च गलनांक और कम अपवर्तनांक के साथ अत्यधिक शुद्धता में सक्षम सामग्री है। कॉर्निंग ग्लास के शोधकर्ता रॉबर्ट मौरर, डोनाल्ड केक और पीटर शुल्त्स ने फाइबर-ऑप्टिक तार या "ऑप्टिकल वेवगाइड फाइबर" (पेटेंट संख्या 3,711,262) का आविष्कार किया, जो तांबे के तार की तुलना में 65,000 गुना अधिक जानकारी ले जाने में सक्षम था, जिसके माध्यम से जानकारी एक पैटर्न द्वारा की जाती है। प्रकाश तरंगों की एक हजार मील दूर भी एक गंतव्य पर डिकोड किया जा सकता है। टीम ने डॉ. काओ द्वारा प्रस्तुत डेसिबल-लॉस समस्या को हल किया था। टीम ने फाइबर कोर में टाइटेनियम डोपिंग करके 633 एनएम पर 17 डीबी/किमी के नुकसान के साथ एक एसएमएफ विकसित किया था। 


1972 के जून तक, रॉबर्ट मौरर, डोनाल्ड केक और पीटर शुल्त्स ने मल्टीमोड जर्मेनियम-डॉप्ड फाइबर का आविष्कार किया, जिसमें 4 डीबी प्रति किलोमीटर की हानि हुई और टाइटेनियम-डॉप्ड फाइबर की तुलना में बहुत अधिक ताकत थी। 1973 तक, जॉन मैकचेसनी ने बेल लैब्स में फाइबर निर्माण के लिए एक संशोधित रासायनिक वाष्प-निक्षेपण प्रक्रिया विकसित की। इस प्रक्रिया ने फाइबर-ऑप्टिक केबल के व्यावसायिक निर्माण का नेतृत्व किया। अप्रैल 1977 में, जनरल टेलीफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स ने कैलिफोर्निया के लॉन्ग बीच में 6 एमबीपीएस पर चलने वाले फाइबर-ऑप्टिक सिस्टम के माध्यम से दुनिया के पहले लाइव टेलीफोन यातायात का परीक्षण और तैनाती की। मई 1977 में बेल द्वारा जल्द ही पीछा किया गया, जिसमें एक ऑप्टिकल टेलीफोन संचार प्रणाली शिकागो क्षेत्र में स्थापित की गई, जिसमें 1.5 मील (2.4 किलोमीटर) की दूरी तय की गई थी। प्रत्येक ऑप्टिकल-फाइबर जोड़ी ने 672 वॉयस चैनलों के बराबर किया और एक DS3 सर्किट के बराबर था। आज दुनिया की 80 प्रतिशत से अधिक लंबी दूरी की आवाज और डेटा ट्रैफ़िक ऑप्टिकल-फाइबर केबलों पर ले जाया जाता है।




vsat kya hai in hindi | what is vsat in hindi




एक बहुत छोटा एपर्चर टर्मिनल (वीएसएटी) एक दो-तरफा ग्राउंड स्टेशन है जो उपग्रहों से डेटा प्रसारित और प्राप्त करता है। एक वीसैट तीन मीटर से कम लंबा है और वास्तविक समय में कक्षा में उपग्रहों के लिए संकीर्ण और ब्रॉडबैंड डेटा दोनों में सक्षम है। फिर डेटा को अन्य दूरस्थ टर्मिनलों या ग्रह के चारों ओर हब पर पुनर्निर्देशित किया जा सकता है। एक बहुत छोटा एपर्चर टर्मिनल (VSAT) एक डेटा ट्रांसमिशन तकनीक है जिसका उपयोग कई प्रकार के डेटा प्रबंधन और उच्च आवृत्ति व्यापार में किया जाता है। वीसैट का उपयोग इसके स्थान पर किया जा सकता है एक बड़ा भौतिक नेटवर्क क्योंकि यह ईथरनेट कनेक्शन जैसे भौतिक साधनों के माध्यम से ले जाने के बजाय उपग्रहों से सिग्नल को उछालता है। क्योंकि सिग्नल को उछालने की आवश्यकता होती है, एक विलंबता समस्या हो सकती है जो भौतिक नेटवर्क के साथ मौजूद नहीं होगी। हालांकि, अधिकांश उपयोगकर्ताओं को लगता है कि यह वह कीमत है जो आप रिमोट एक्सेस और कम बुनियादी ढांचे के लिए भुगतान करते हैं और इसे एक उचित व्यापार मानते हैं। मौसम VSAT नेटवर्क की प्रभावकारिता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।




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history of vsat in hindi | vsat ka itihas kya hai



1985 में, Schlumberger Oilfield Research ने तेल क्षेत्र ड्रिलिंग और अन्वेषण इकाइयों के लिए पोर्टेबल नेटवर्क कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए ह्यूजेस एयरोस्पेस के साथ दुनिया के पहले Ku बैंड (12-14 GHz) VSAT का सह-विकास किया। Ku Band VSAT आज डेटा या टेलीफोनी अनुप्रयोगों के लिए उपयोग की जाने वाली अधिकांश साइटों का निर्माण करता है। यूएस पोस्टल सर्विस के लिए स्पेसनेट और एमसीआई द्वारा सबसे बड़ा वीसैट नेटवर्क (12,000 से अधिक साइट) विकसित किया गया था।





isdn kya hai | ISDN in Hindi | what is isdn in hindi


आईएसडीएन या integrated services digital network एक सर्किट-स्विच्ड telephone network system है जो digital line पर डाटा और voice को ट्रांसमिट करता है। आप इसे data voice और signaling संचारित करने के लिए संचार मानकों के एक set के रूप में भी सोच सकते हैं। ये digital लाइनें ताम्बे की लाइनें हो सकती हैं। इसे पुरानी लैंडलाइन तकनीक को डिजिटल में स्थानांतरित करने के लिए डिज़ाइन किया गया था। ISDN कनेक्शन पारंपआरिक connection की तुलना में बेहतर स्पीड और उच्च गुणवत्ता provide करने की प्रतिष्ठा रखते हैं। तेज़ स्पीड और बेहतर connection data ट्रांसमिशन को अधिक मज़बूती से यात्रा करने की permission देते हैं। एक ISDN के लिए आधुनिक उन्नयन एक SIP ट्रंक प्रदाता का उपयोग करेगा वे पीबीएक्स के लिए व्यावसायिक phone सेवा के लिए डाटा का इस्तेमाल करते हैं।




isdn ka itihas | history of isdn in hindi


आईएसडीएन का जन्म आवश्यकता से हुआ था। एनालॉग फोन नेटवर्क लगातार विफल रहे और लंबी दूरी के कनेक्शन के लिए अविश्वसनीय साबित हुए। 1960 के दशक में, सिस्टम को पैकेट-आधारित, डिजिटल स्विचिंग सिस्टम में बदलना शुरू हुआ। संयुक्त राष्ट्र स्थित अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ, या आईटीयू ने 1988 में ऑपरेटिंग कंपनियों के लिए डेटा वितरित करने के लिए एक नई प्रणाली के रूप में आईएसडीएन की सिफारिश करना शुरू किया। संचार प्रदाताओं को आईएसडीएन की पेशकश शुरू करने में अभी भी समय लगा। यह मुख्य रूप से इसलिए था क्योंकि उस समय दोनों प्रमुख कंपनियां अलग-अलग ऑपरेटिंग सिस्टम पर थीं। 1990 के दशक तक, राष्ट्रीय आईएसडीएन 1(संक्षिप्त के लिए N 1-2लेबल) बनाया गया था।



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 हालांकि यह नवाचार संचार की गुणवत्ता में सुधार कर सकता है, फिर भी एक सहमत मानक को समझने में समय लगता है। अंत में, मोटोरोला और यूएस रोबोटिक्स जैसे निर्माताओं ने सभी के लिए संक्रमण को आसान बनाने का फैसला किया। इसके बाद आईएसडीएन को पूरे अमेरिका में लॉन्च किया गया। इसने उपभोक्ताओं को बेहतर मूल्य निर्धारण और उच्च-बैंडविड्थ इंटरनेट का उपयोग प्रदान किया। आज, आईएसडीएन को ब्रॉडबैंड इंटरनेट एक्सेस कनेक्शन जैसे डीएसएल, डब्ल्यूएएन, और केबल मोडेम द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया है। यह तब भी बैकअप के रूप में उपयोग किया जाता है जब मुख्य लाइनें विफल हो जाती हैं।



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दोस्तों उम्मीद करता हूँ आपको इन्टरनेट से रिलेटेड सारी इनफार्मेशन मिल गई होगी हालांकि पोस्ट काफी लंबी होगयी लेकिन इस पोस्ट में आपको इन्टरनेट से जुडी सारी इनफार्मेशन प्रोवाइड की गयी है अगर आपको ये जानकारी अच्छी लगी हो तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर करें।

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